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वाराणसी जिले के जैतपुरा स्थित नागकुआँ मंदिर से शनिवार को जल की निकासी के बाद नागकूप में हुए नागेश्वर महादेव के दर्शन...

वाराणसी जिले के जैतपुरा स्थित नागकुआँ मंदिर से शनिवार को जल की निकासी के बाद नागकूप में हुए नागेश्वर महादेव के दर्शन...

वाराणसी जिले के जैतपुरा स्थित नागकुआँ मंदिर से शनिवार को जल की निकासी के बाद नागकूप में हुए नागेश्वर महादेव के दर्शन…नागपंचमी के बाद वाराणसी जिले में जैतपुरा स्थित नागकूप से शनिवार को जल की निकासी की गई। इसके बाद लगभग 80 फीट की गहराई में स्थित नागेश्वर महादेव शिवलिंग का भक्तों को दर्शन हुआ।

नागपंचमी के बाद साल में सिर्फ एक बार दिखने वाले महादेव के इस स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। नागपंचमी के बाद कूप की सफाई की जाती है। इसके लिए बड़े पंप लगाए जाते हैं।
पुजारियों और कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वार्षिक सफाई के बाद नागेश्वर महादेव का विधि विधान से पूजन होता है। धीरे-धीरे कूप का पानी बढ़ने से महादेव फिर जल के नीचे चले जाते हैं।

श्रद्धालुओं ने बताया कि नागेश्वर महादेव के दर्शन से कष्ट दूर होते हैं। यहां कालसर्प दोष की शांति के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैंमंदिर के पुजारी चंदन पांडेय के अनुसार, नागकूप का उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है।

काशी के ओंकारेश्वर खंड में स्थित इस नाग मंदिर का संबंध नागों और भगवान शिव से जुड़ी प्राचीन कथा के साथ महाभारत काल में राजा परीक्षित के पौत्र जनमेजय के सर्प यज्ञ से भी है

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